उम्र हो चाहे कोई भी

उम्र हो चाहे कोई भी प्यार करना लाजिमी है |

प्यार से ही प्यार में तकरार करना लाजिमी है।।

इश्क को कहते हैं दरिया आग का मानो मगर ।
तैर कर एकबार दरिया पार करना लाजिमी है ||
जिंदगी भर नज़रें उनकी मेरी सूरत पे टिकें।
इसलिए हो बेझिझक श्रृंगार करना लाज़िमी है।
अश्क आँखों को मिले वो भी करो मन्जूर की |
प्यार का तोहफ़ा सभी, स्वीकार करना लाजिमी है ||
यूँ तो आँखों को भी पढ़ना, सीखा है मैंने मगर |
लफ्जों से भी इश्क का इज़हार करना लाजिमी है ||
मानते हैं झूठ कहना, है गलत लेकिन किरण |
इश्क में गुस्ताखियाँ, हर बार करना लाजिमी है ||

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