कोरोना का रोना मत रो

कोरोना का रोना मत रो, और न आहें भर।
बदल आदतें अपनी हे जन , व्यर्थ न इतना डर।

नाक बहे हो सूखी खाँसी, लगे ज़रा भी ज्वर।
शिघ्र परीक्षण करवाकर के, फिर इलाज लो कर।
छोड़ – छाड़ कर काम – धाम सब , रह तू अपने घर।
बदल आदतें अपनी हे जन , व्यर्थ न इतना डर।

तन को दे आराम ज़रा सा, कर ले साधित मन।
पौष्टिक भोजन ही करना है , यह भी ले- ले प्रण।
इधर-उधर का भ्रमण टाल दे , भटक नहीं दर – दर
बदल आदतें अपनी हे जन , व्यर्थ न इतना डर।

नाक – कान को बेमतलब का, बार – बार मत छू।
धोना अपना हाथ हमेशा, भूल न जाना तू।
नहीं मिला फिर हाथ किसी से, नमस्कार अब कर
बदल आदतें अपनी हे जन , व्यर्थ न इतना डर।

खतरनाक है व्याधि भले पर, हम जायेंगे लड़ ।
सावधान होकर डग भरना ,  होना है अब रण।
जीत हमारी ही है निश्चित, थोड़ा धीरज धर।
बदल आदतें अपनी हे जन , व्यर्थ न इतना डर।

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