नतमस्तक

मुकुल – मम्मा लाॅकडाउन में तो घर पर रह कर मेरी दो महीने की करीब – करीब पूरी सैलरी बच गई, अब इलेक्ट्रॉनिक्स दुकाने खुल गई हैं मैं आज ही जाकर डिस वाशर और अच्छा वाला वैक्यूम क्लीनर लाता हूँ ताकि आइंदा से आपको इतनी परेशानी न हो।शालिनी – नहीं – नहीं कोई जरूरत नहीं है तुम अपने पैसे बचाकर रखो।
मुकुल – ओह मम्मा आप भी न…. इस पीरियड में आपको कितनी परेशानी हुई क्या मैंने नहीं देखा आप भी न केवल पैसे बचाओ – पैसे बचाओ कहती रहती हैं। अभी तो मेरे जाॅब की शुरुआत है आगे बहुत पैसे कमा लूंगा और वैसे भी जाॅब के बाद मुझे तो आपको गिफ्ट देना ही था तो यही सही.. अब मना मत कीजिये।
शालिनी फिर से नहीं मुकुल बिल्कुल भी नहीं खरीदो क्योंकि मुझे कुछ खास परेशानी नहीं हुई। सच तो यह है कि मैं अब  ज्यादा ही फिटनेस महसूस कर रही हूँ । मैं एक्सरसाइज कर- कर के तथा टहल – टहल कर थक गई थी लेकिन वजन नहीं कम हुआ और देखो तो इन दो महीनों में झाड़ू पोछा बर्तन करके मेरे वजन कम हो गये – साथ ही आत्मविश्वास भी बढ़ा कि मैं अब अपना काम खुद  कर सकती हूँ।
और इसके अलावा सोचो तो जो बीस वर्ष से शीलाबाई मेरा काम कर रही है उसे काम से कैसे हटा दूँ ?
माँ की बातें सुनकर मुकुल अपनी माँ के सम्मुख नतमस्तक हो गया।

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