इश्क के रंग हजार

इश्क इबादत है, इश्क खुदा की सबसे बड़ी नेमत है, इश्क जज्बातों की आंधी है, इश्क एक-दूसरे की चाहत में कुछ कर गुजरने का जज्बा है , इश्क आग का दरिया है, इश्क सिर्फ इश्क है आदि – आदि अलग – अलग लेखकों, कवियों, शायरों ने अपने – अपने अपने तरीके से इश्क को महसूसा और बयां किया । लेकिन लेखिका रीता गुप्ता जी की जादूगरनी लेखनी ने तो इश्क के हजार रंगों को न सिर्फ ढूढ़ निकाला बल्कि अपने खूबसूरत शब्दों की तूलिका से पन्नो पर उकेरा और ला दिया खूबसूरत और आकर्षक कवर पृष्ठ से सुसज्जित खूबसूरत कहानियों का एक खूबसूरत संग्रह, जिसका शीर्षक ही है इश्क के रंग हजार।
एक सौ अट्ठाइस पृष्ठ में संकलित इस पुस्तक में कुल सत्रह छोटी – छोटी कहानियाँ हैं।
संकलन की पहली कहानी जो इश्क के रंग हजार, इस पुस्तक का शीर्षक भी है, एक अलग ही इश्क की कौतूहल पूर्ण कहानी है, जिसे पढ़ते हुए पाठक भावनाओं में बहता चला जाता है और कहानी की नायिका की तरह ही रंगबिरंगी परिकल्पना करने लगता है। अन्ततः सच का सामना होता है तो नायिका का दिल तो टूट जाता है फिर भी अंत सुखद होता है जो कि लेखिका की प्रखर लेखनी का एक अजूबा साक्ष्य प्रस्तुत करता है।
संकलन की दूसरी कहानी आमाके खमा करो एक परदेशी पूत के माता-पिता की करुण कहानी है जिसे पढ़ते हुए पाषाण हृदय भी पिघल कर आखों से बहने को विवश हो जायेगा ऐसा मैं दावे के साथ कह सकती हूँ ।
संकलन की तीसरी कहानी पुरसुकून की बारिश एक बहुत ही पावन और खूबसूरत प्रेम कहानी है जिसमें नायक नायिका के हर कष्ट में एक देवदूत की तरह प्रकट होकर रक्षा कवच बन जाता है।

संग्रह की चौथी कहानी बाबा ब्लैकशिप में लेखिका ने अपनी प्रखर लेखनी का परिचय देते हुए पिता – पुत्र के कटु सम्बन्ध के परिणाम को उजागर किया है जिसमें न्युज पेपरों में यह ख़बर छपी थी कि विदेश में बसे पुत्र ने पिता की मरने की खबर जाने पर भी फोन नहीं उठाया लेकिन रिश्ते का पोस्टमार्टम करने के बाद सच्चाई कुछ और ही सामने आती है जिसमें अपने बच्चों के मासूम भावनाओं को बेदर्दी से तहस -नहस कर देने वाले अभिभावकों की असलियत सामने लाकर नई पीढ़ी को दोषमुक्त कर दिया गया है।

संग्रह की पाँचवी कहानी वीणा की तार सी जिंदगी एक नवदम्पति की कहानी है जिसमें पति-पत्नी दोनों ही एक-दूसरे को प्रभावित करने के लिए अपने मूल स्वभाव के विपरीत छद्म रूप धर कर सलीके से चल रहे थे लेकिन अचानक कुछ ऐसा हुआ कि दोनो का ही असल रूप सामने आ गया और जिंदगी वीणा की तार सी झनक उठी ।
इस संग्रह की छठी कहानी काँटों से खींच कर ये आँचल में कहानी की नायिका के सर से बचपन में ही माँ – बाप का साया उठ गया और उसपर मनहूस होने का कलंक अपने ही चाचा – चाची के द्वारा लगा दिया गया। यह कलंक उसे इतना दबा दिया कि अपने से दुगने उम्र के विधुर से विवाह तय करने के अपने चाचा – चाची के निर्णय का विरोध नहीं कर पायी और चुपचाप विवाह बंधन में बंध कर ससुराल चली गई।
लेकिन वहाँ पर अपने सरल व स्निग्ध स्वभाव से वर अपने पति के साथ – साथ सौतेले बच्चों का दिल भी जीत लेती है।
इस कहानी में नायिका के त्याग व समर्पण का खूबसूरत और मर्म स्पर्शी तथा प्रेरक चित्रण कर कहानी को एक नया मोड़ दिया गया है है जिसके लिए लेखिका की जितनी भी तारीफ़ की जाये कम होगी।
संग्रह की सातवीं कहानी हम – तुम कुछ और बनेंगे एक निः संतान दम्पति की कहानी है जिसमें पति औलाद की ख्वाहिश में अपनी पत्नी के गर्भ में किसी और का शुक्राणु निषेचित करवाने के लिए तो तैयार हो जाता है लेकिन बाद में उसके अंदर का शक उसे अपनी पत्नी से दूर कर देता है। पर अन्ततः उसे सच्चाई का पता चलता है और पश्चाताप के आँसुओं से उसके मन के सारे मैल धुल गये।
संग्रह की आठवीं कहानी थोड़ी सी जमीन सारा आसमान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का समर्थन करती हुई बहुत ही प्रभावी व प्रेरक कहानी बन पड़ी है।
संग्रह की नौवीं कहानी शिद्दत ए एहसास बहुत ही मार्मिक है जिसे पढ़ते हुए पत्थर हृदय भी पिघल कर आँखों से बहने को आकुल हो जायेगा।

इस प्रकार इस संग्रह की अन्य कहानियाँ ( हमसाया, आवारागर्दियों का सफ़र, जिंदगी मेरे घर आना, आशा साहनी के बहाने, रक्षाबंधन, बाजूबंद, चौबे गये छब्बे बनने, व दिल की वो रहस्यमयी परतें) भी बहुत ही भावपूर्ण, हृदय स्पर्शी, रोचक, कौतूहल पूर्ण एवम् प्रभावी हैं जिसे पढ़ते हुए पाठक भावनाओं के सागर में डूब जायेगा और कहानी के पात्रों को अपने इर्द-गिर्द ही पायेगा।
इस संकलन की खास बात यह है कि इसकी अधिकांश कहानियाँ विभिन्न प्रतिनिधि पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर पाठकों का प्यार व प्रशंसा पा चुकीं हैं।
पुस्तक की छपाई स्पष्ट व पन्ने उत्कृष्ट हैं। इस हिसाब से पुस्तक का मूल्य भी सही ही है।
अतः हम दावे के साथ कह सकते हैं कि यह पुस्तक पठनीय व संग्रहणीय है ।
यह लेखिका की पहली पुस्तक है इसलिए हम लेखिका
को हृदय से बधाई देते हुए उनके उज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

किरण सिंह

लेखिका – रीता गुप्ता
प्रकाशक – वनिका पब्लिकेशन
मूल्य – 300 रुपये ( तीन सौ रुपये)

पुस्तक अमेजन पर उपलब्ध है ।

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