इन दिनों

गिर रहा आँखों से पानी इन दिनों 

गिर रहा आँखों से पानी इन दिनों 
जिंदगी ने जंग ठानी इन दिनों।

अब डराती हैं हमें नजदीकियाँ,
लाजिमी दूरी बनानी इन दिनों।

बन्द हो अब जिस्म की सौदागिरी, 
इश्क ही लगता रुहानी इन दिनों। 

नाचती घुंघरू को पग में बांधकर, 
मौत होकर के दिवानी इन दिनों। 

आदतें जो भी बुरी हों छोड़िये, 
है सिसकती जिंदगानी इन दिनों। 

कर ‘किरण’ घर में ही तू चिंतन मनन, 
लिख दे फिर कोई कहानी इन दिनों।। 

बांट कर गम खुशी से

बाँट कर गम खुशी से पीया कीजिये.
शौक से जिंदगी को जीया कीजिये।

शामिल हो सभी की खुशी में कभी ,
खुशियों का खुशी से गुणा कीजिये।

यूँ ही कट जायेगा जिंदगी का सफ़र,
अपनो से हमेशा मिला कीजिये।

माफ़ कर हर कहा और सुना आप अब ,
चाहे तारीफ़ या फिर गिला कीजिये।

जिंदगी को जीयेगी किरण शान से,
मौत से बेवजह न डरा कीजिये।

इश्क का रिश्ता

इश्क का रिश्ता वे भी निभाते रहे,
ख्वाबों में ही सही आते-जाते रहे।

मैं तो सच के सहारे ही स्थिर रही,
पर यकीं वे मेरा डगमगाते रहे।

गीतों में ढाल उनको मैं लिखती रही.
और वे उसको पढ़ गुनगुनाते रहे।

मेरे हिस्से में आई उदासी भले ,
वे हमेशा मगर मुस्कुराते रहे।

यूँ ही कटते रहे दिन उम्मीदों तले,
ख्वाब भी तारे बन झिलमिलाते रहे।

किया मैंने यकीं उन पे बन्द आँखों से,
लेकिन वे मुझे आजमाते रहे।

हूँ किरण मैं हमेशा बिखरती रही,
फासले दरम्यां तड़पाते रहे।

क्या पिलाया आपने की

क्या पिलाया आपने की ,हैं नशे में चूर हम।
फर्क अब पड़ता नहीं क्यों , पास हैं की दूर हम।

लग रही थी जिंदगी, मेरी अधूरी सी मगर।
मिल गये हैं आप तो, फिर हो गये पुरनूर हम।

कर जो दी तारीफ़ मेरी, आपने कुछ इस तरह।
हो गये हैं धीरे-धीरे, खुद ब खुद मगरूर हम।

आपकी आँखों में ही, कुछ बात है लगता हमें ।
देखकर होता है जिसमें, नाज़ की हैं हूर हम।

जिंदगी की इस कड़ी में, हो गई शामिल किरण।
देखते हैं इस सफ़र में , जाते कितनी दूर हम ।।

अब तक मैं चली हूँ सम्हलकर

मैं चली हूँ हमेशा सम्हल कर
अब देखूंगी काँटों पे चल कर

रौशन मैं तिमिर को करूंगी
भले मिट जाऊँ बाती सी जल कर


उफ्फ तक न करूंगी सफर में

पीर बह जाये चाहे पिघल कर

तुझमें मैं ढली धीरे-धीरे
सीख ली मैं हुनर खुद में गल कर

कभी तो मेरी भी होगी पूजा
ज़रा देखूंगी मूरत में ढल कर

प्रीत की रीत मैंने निभाई
जिंदगी के जटिल प्रश्न हल कर

नेह निश्छल रहेगा किरण का,
भले तू मुझसे कितना भी छल कर

उम्र हो चाहे कोई भी

उम्र हो चाहे कोई भी प्यार करना लाजिमी है |

प्यार से ही प्यार में तकरार करना लाजिमी है।।

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सर पटकने से पत्थर पिघलता नहीं।

सर पटकने से पत्थर पिघलता नहीं।
लिखा किस्मत का टाले से टलता नहीं।।

लग गया हो अगर इश्क का रोग तो,
लाख कर लो जतन दिल बहलता नहीं।

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