बहुत करती हूँ मैं तुमसे प्यार,

बहुत करती हूँ मैं तुमसे प्यार,
सुनो सच कहती हूँ मैं |
लो मैं करती हूँ सच स्वीकार,
कि तुमपर ही मरती हूँ मैं |

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सुनो सूरज कि मैं हूँ तुम्हारी किरण,

प्यार तुमसे हमेशा मैं करती रही हूँ

तुमपर जी – जी कर तुम पर ही मरती रही हूँ

हो तपन या कि चलती हो शीत लहर,

तुम उगे तो खुशी से मैं खिलती रही हूँ |

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बेटियों की माँ


न मारो बेटियों का गर्भ में भ्रुण बेटियों की माँ |
रखो उनका भी कुछ अधिकार अक्षुण्ण बेटियों की माँ |

दुनिया चाहती हैं देखना आने दो उनको भी ,
खोल दो द्वार कर लो साफ अब मन बेटियों की माँ |

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तोड़ कर सारे बंधन

मेरे भी कब्र पर बनते ताज पर ,
इश्क मेरा भी होता जांबाज गर |

तोड़ कर सारे बंधन चली आती मैं,
दी होती मुझे तुमने आवाज़ गर |

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पत्थर का है दिल

पत्थर का है दिल उनका , पिघलाना बहुत मुश्किल |
उनकी खबर कैसे लूँ , वहाँ जाना बहुत मुश्किल |

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आज सोलह श्रृंगार कर लूंगी

आज सोलह श्रृंगार कर लूंगी
मैं सितारों से माँग भर लूंगी

टूट कर तारे ज्यों ही गिरेंगे
आँचल में मैं उन्हें भर लूंगी

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दर्द पी लूंगी आहें भरूंगी नहीं,

दर्द पी लूंगी आहें भरूंगी नहीं,
जिंदगी से शिकायत करूंगी नहीं |

दूर रह कर भी खुश हो अगर मुझसे तुम,
लौट आने को फिर मैं कहूँगी नहीं

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