कामनाएँ फिर से जागी जा रही है

कामनाएँ फिर से जागी जा रही
भावनाएँ भी उमड़ कर आ रहीं है

रात में छुपकर मधु का पान कर
चांदनी चंदा में सिमटी जा रही है

आ गया नव वर्ष सजकर देख लो
रागिनी नव गीत सुर में गा रही है

खिल गईं किरणें भी देखो आस की
यामिनी लेकर बिदाई जा रही है

ओस की बूंदें धरा को चूमकर
फिर गगन को ले संदेशा जा रहीं है

सर्द से ठिठुरी किरण अलसाई सी
संग रवि के खिल के देखो आ रही है

श्याम सलोने आओ जी

हे श्याम सलोने आओ जी
अब तो तुम दरस दिखाओ जी

आओ मधु वन में मुरलीधर
प्रीत की बंशी बजाओ जी

पढ़ना जारी रखें “श्याम सलोने आओ जी”

उचर रहा छज्जे पर कागा

उचर रहा छज्जे पर कागा , कोयलिया सुर में गाई है |
जानी पहचानी सी खुशबू , लेकर पुरवाई आई है |

घड़ी दो घड़ी चैन न आवै, द्वारे बार बार मैं जाऊँ |
शायद साजन ने मुझको फिर , कोई चिट्ठी पिठवाई है |

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वादा करती हूँ तुझसे

वादा करती हूँ तुझसे निभाया करूंगी,
रोज सपनों में तेरे मैं आया करूंगी |

कुछ अपनी कहूंगी तेरी भी सुनूंगी,
यूँ ही दिल अपना बहलाया करूंगी |

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पहली बार

पहली बार उनका आना मुझे याद है सखी |
खट से कुंडी खटखटाना मुझे याद है सखी |

खोली दरवाजा तो सामने वे मिले,
नज़रों का टकराना मुझे याद है सखी ||

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महसूस करती हूँ

महसूस करती हूँ तुम्हें कितना कि तुमसे क्या कहूँ |
पड़ न जाये शब्द कहीं कम मैनें न सोचा कहूँ |

लिखकर उर के पन्नों पर अधरो को मैने सी लिया,
तुम तो समझते हो मुझे मैं न कहूँ या हाँ कहूँ!

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बिदाई की घड़ियाँ

जब भी याद आतीं बिदाई की घड़ियाँ |
भर आतीं हैं मेरी आँसू से अँखियाँ ||

बीता था बचपन जिस आँगन में मेरा |
कैसे भूल जाऊँ वो नैहर की गलियाँ |

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आज उजड़े चमन में

मेरे उजड़े चमन में बहार आ गई ,
कविताएँ मेरे संग इतरा गई |

सोचा भी न था कि वे मिलेंगे कभी,
देखकर उनको मैं थोड़ा घबरा गई |

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मेरे दिल के तार

मेरे दिल के तार तुमसे जुड़ गये न जाने कैसे ,
हुआ प्रेम मुझको चुपके – चुपके न जाने कैसे |

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