रूप अपना मैं

रूप अपना मैं अक्सर बदलती रही
आपमें ही हमेशा मैं ढलती रही

माला बन आपके उर सुसज्जित रहूँ
खुद में ही मैं कुंदन सी गलती रही

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ये हवाएँ बसंती

ये हवाएँ बसंती बहकने लगीं ,
सर से चूनर सरर सर सरकने लगीं |

मिल गई उनके आने की ज्यों ही खबर ,
चूड़ियाँ मेरी खन खन खनकने लगीं |

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पलकों में ही अश्रुओं को

पलकों में ही अश्रुओं को पीना सीख लिया ,
रोते – रोते हँस के मैंने जीना सीख लिया,

अपनो की खुशियों में अक्सर भूलकर अपनी खुशी ,
धीरे-धीरे ही सही खुश होना सीख लिया |

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सिंदूर का ये नाता

सिंदूर का ये नाता गहरा बहुत होता है ,
भर मांग प्रीत रंग से अपना बना लेता है |

चुटकी भर रंग उसका सात जन्म तक न छूटे,
ये रंग जादूगर है लाली चढ़ा देता है |

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