जाऊँगा मैं स्कूल

जाऊँगा मैं स्कूल

रोज मुझे बहलाकर मम्मी,
नहीं बनाओ फूल।
नाम लिखा दो मेरा भी अब ,
जाऊँगा मैं स्कूल।

देखो मेरे भैया राजा,
कितने बनते स्मार्ट ।
पढ़ना-लिखना मुझको भी है,
करना जल्दी स्टार्ट।

अभी बहुत छोटे हो बेटा,
जिद्द करो मत व्यर्थ ।
पढ़ना-लिखना क्या है प्यारे ,
पहले समझो अर्थ।

क ख ग घ ए बी सी डी,
वन टू एक दो तीन।
चलो पढ़ाती हूँ मैं तुमको,
उँगली पर गिन – गिन।

मान लिये गोलू राजा फिर,
मम्मी की यह बात।
लगे पढ़ाई करने घर में,
मन से वह दिन रात।

धीरे-धीरे गोलू राजा,
हो गये होशियार।
मम्मी – पापा भैया उनको,
करते प्यार – दुलार।

बड़े हुए जब गोलू राजा,
दिये स्कूल में टेस्ट।
दिये जवाब फटाफट सार,
मार्क्स आ गया बेस्ट।

फिर मस्ती में गोलू राजा,
गये खुशी से झूम ।
मम्मी पापा लिये गर्व से,
उनका माथा चूम।

आम

खट्टा – मीठा ताजा आम।
सबका जी ललचाता आम ।

हिम सागर बादामी बीजू
केसर, चौसा लंगड़ा आम।

नाम गिनाऊँ कौन – कौन सा ,
करूँ बड़ाई कितना आम।

बनी चटपटी चटनी उसकी ।
जब रहता है कच्चा आम।

बन अचार तैयार हुआ तो ,
मुंह में पानी लाता आम।

फेंट दूध में सेक बना जब ,
सबके मन को भाता आम।

भरा हुआ है खास गुणों से,
फिर भी खुद को कहता आम।

इसीलिए शायद बन बैठा ,
सभी फलों का राजा आम ।

आया सर्दी का मौसम

आया सर्दी का मौसम।

खिली धूप देखो थम – थम
आया सर्दी का मौसम।

ठन्डी – ठन्डी हवा बही
डोल – डोल कर मतवाली
लहराती अपना परचम
आया सर्दी का मौसम।

लगा ठिठुरने अम्बर धरती
गर्मी दुबकी आहें भरती
लगे निकलने कपड़े गर्म
आया सर्दी का मौसम

रात बड़ी हो अड़ी रही
दिन से दिल की बात कही
देखें किसमे कितना दम
आया सर्दी का मौसम

समय सभी का आता है
तभी भाग्य लड़ जाता है
नहीं किसी से कोई कम
आया सर्दी का मौसम।

छोड़ो भइया व्यर्थ लड़ाई
चलो निकालें नर्म रजाई
ओढ़ चैन से सोये हम
आया सर्दी का मौसम

नीले – नीले आसमान में,

नीले – नीले आसमान में, देखो सूरज दमक रहा है। 

हीरे और सोने के जैसा , चम चम चम चम चमक रहा है।

बोले बिट्टू राजा हठ कर, मम्मी मुझको नहला दो। 

कोई क्रीम लगाकर मुझको , सूरज जैसा चमका दो। 

मम्मी बोली ओ के बेटा, बात सुनो पहले मेरी । 

पढ़ो लिखो जी जान लगाकर, तो होगी इच्छा पूरी। 

बिट्टू बोले झूठ बोलकर, मुझे न माँ यूँ बहलाओ। 

पढ़ – लिख कर कैसे चमकूंगा, सही – सही तुम समझाओ। 

मम्मी लाई दूध ग्लास में, बोलीं बेटा लो पी लो। 

सभी बात को बे मतलब का, तुम इतना भी मत छीलो। 

बिट्टू राजा समझ-बूझ कर, खुद करने लगे पढ़ाई। 

सारे जग में फिर उनकी भी, लोगों ने किया बड़ाई। 

मम्मी उनको गले लगाकर, बोली तू ही सूरज है। 

मेहनत का फल होता मीठा, यह नहीं झूठ अचरज है। 

गोलू मोलू बबलू डबलू

गोलू मोलू बबलू डबलू खेल रहे थे बाॅल
आयीं आंटी बीच में तो उड़ गई उनकी शाॅल

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