दिन रैन तुम्हारे

दिन रैन तुम्हारे संग मैं कल्पित प्रीत निभाती हूँ |
शब्दों में भर – भर प्रीत पिया नव गीत बनाती हूँ |

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तुझे कांटे चुभे

तुझे कांटे चुभे और , मेरे पाँव रक्त रंजित |
सपने जो टूटे तेरे , तो हृदय हमारा खंडित |
क्या यही है प्रेम सच्चा , पूछो न अपने दिल से |
मिले हाल जो न तेरा , मेरा दिल रहे सशंकित ||