बच्चों में चुगली की आदत न पनपने दें ।

बच्चों में चुगली की आदत न पनपने दें।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार चुगली करना अपने दिल की भड़ास निकालने का एक अच्छा माध्यम है।  या यूँ कहें कि  हीन भावना से ग्रस्त व्यक्ति चुगली करके खुद को तुष्ट करने का प्रयास करता है। इसीलिए वह खुद में कमियाँ ढूढने की बजाय दूसरों की मीन-मेख निकालने में अपनी उर्जा खपाते रहता है।
चुगलखोर व्यक्तियों की दोस्ती टिकाऊ नहीं होती :-
वैसे हम चुगलखोरों को लाख बुरा- भला कह लें लेकिन सच तो यही है कि निंदा रस में आनंद बहुत आता है। शायद यही वजह है कि अपेक्षाकृत चुगलखोरों के सम्बन्ध अधिक बनते हैं। या यूँ कहें कि चुगलखोरों की दोस्ती जल्दी हो जाती है। लेकिन यह भी सही है कि उनकी दोस्ती टिकाऊ नहीं होती। क्योंकि वास्तविकता का पता लगने पर लोग चुगलखोरों से किनारा करने लगते हैं।

बच्चों में चुगलखोरी की आदत न पनपने दें :-

अक्सर देखा गया है कि बच्चे जब  गलती करते हुए अभिभावकों द्वारा पकड़े जाते हैं और पेरेंट्स पूछते हैं कि कहाँ से सीखा? तो वे अपने को तत्काल बचाने के लिए अपने दोस्तों या फिर भाई बहनों का नाम ले लेते हैं जिससे पेरेंट्स का ध्यान उनपर से हटकर दूसरों पर चला जाता है। यहीं से चुगलखोरी की आदत लगने लगती है।
एक बार सोनू की मम्मी सोनू को पैसे चोरी करते हुए पकड़ लीं और फिर डाट डपटकर पूछने लगीं कि यह सब कहाँ से सीखे। सोनू ने तब अपना बचाव करने के लिए अपने पड़ोस के दोस्त का नाम ले लिया। यह बात सोनू की मम्मी ने उसके दोस्त की मम्मी से यह  कह दिया। परिणामस्वरूप सोनू के दोस्त ने सोनू को चुगलखोर कहकर सोनू से दोस्ती तोड़ ली। और सोनू दुखी रहने लगा।
यहाँ पर सोनू की मम्मी को किसने सिखाया है यह नहीं पूछकर चोरी के साइडइफेक्ट्स बताकर आगे से ऐसा नहीं करने की सीख देनी चाहिए थी । साथ ही यह भी बताना चाहिए था कि चुगली करना और चोरी करना दोनों ही पाप है।
तुलना करने से भी बढ़ती है चुगली करने की प्रवृत्ति :-
कभी-कभी  पेरेंट्स अनजाने में ही अपने बच्चों को आहत कर चुगली करने की प्रवृति को बढ़ावा देते हैं।
दीपक के पापा हमेशा ही अपने दीपक की तुलना अपने दोस्त के बेटे कुणाल से करते हुए कुणाल की प्रशंसा कर दिया करते थे जिससे दीपक का कोमल सा बाल मन आहत हो जाता था और वह कुणाल की तरह बनने की कोशिश करता था और जब उसकी तरह बनने में नाकामयाब हो गया तो वह अपने पापा से कुणाल की झूठी सच्ची चुगली करने लगा।

2 विचार “बच्चों में चुगली की आदत न पनपने दें ।&rdquo पर;

  1. सही बात
    शनि, 26 सित॰ 2020, 22:29 को ज्योति कलश ने
    लिखा:
    > Kiran Singh posted: ” बच्चों में चुगली की आदत न पनपने दें। मनोवैज्ञानिकों
    > के अनुसार चुगली करना अपने दिल की भड़ास निकालने का एक अच्छा माध्यम है। या
    > यूँ कहें कि हीन भावना से ग्रस्त व्यक्ति चुगली करके खुद को तुष्ट करने का
    > प्रयास करता है। इसीलिए वह खुद में कमिय”
    >

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